Mahashay Dharampal Gulati (MDH) Biography in Hindi | महाशय धर्मपाल गुलाटी (एम. डी. एच) जीवन परिचय
महाशय धर्मपाल गुलाटी से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियाँ
- गुलाटी का जन्म पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था, जहां उनके पिता “महाशियाँ दी हट्टी” नामक एक दुकान से मसाले बेचने का कार्य करते थे।
- वह आर्य समाज के बहुत बड़े अनुयायी हैं।
- 10 वर्ष की उम्र में, उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा छोड़ दी (जब वह पांचवी कक्षा में थे) और अपने पिता की दुकान पर कार्य करना शुरू कर दिया।
- 7 सितंबर 1947 को, वह भारत-पाक विभाजन के बाद अपने परिवार के साथ पाकिस्तान से दिल्ली, भारत लौट आए।
- उसके बाद, वह दिल्ली के करोल बाग़ में अपनी भतीजी के घर पर रहने लगे, जहां पानी, बिजली की आपूर्ति नहीं थी।
- जब वह दिल्ली आए, तब उनके पिता ने उन्हें ₹1500 दिए थे, जिसमें से धर्मपाल गुलाटी ने ₹650 का तांगा (घोडा गाड़ी) खरीद लिया और कनॉट प्लेस से करोल बाग़ तक यात्रियों से 2 आने लेते थे।
- उन्हें अपनी आजीविका के लिए पर्याप्त रूप से साबित नहीं होने के कारण अक्सर अपमानित होना पड़ता था। इसलिए उन्होंने अपनी तांगा (घोडा गाड़ी) को बेच दिया और अजमल खान सड़क के किनारे एक छोटी सी दुकान बनाई और अपने परिवार का पुराना कारोबार मसालों को बेचना शुरू किया।
- प्रारंभ में सफलता के बाद, उन्होंने वर्ष 1953 में चांदनी चौक में एक और दुकान किराए पर ली, जिसके चलते वर्ष 1959 में उन्होंने स्वयं की फैक्ट्री स्थापित करने के लिए कीर्ति नगर में जमीन खरीदी, जहां उन्होंने एमडीएच मसालों के साम्राज्य यानि महाशियां दी हट्टी लिमिटेड की स्थापना की, जिसका अर्थ है “एक महानुभाव आदमी की दुकान” पंजाबी में।
- एमडीएच स्विट्ज़रलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, कनाड़ा, यूरोपीय देशों, इत्यादि में मसालों का निर्यात करता है।
- वर्तमान में, एमडीएच भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में मसालों की श्रेणी में सबसे बड़े ब्रांडों में से एक के रूप में उभरा है, जिसका 90 साल की उम्र पार करने के बाद भी धर्मपाल गुलाटी स्वयं एमडीएच उत्पादों का विज्ञापन करते हैं।
- एमडीएच 50 से भी अधिक विभिन्न उत्पादों को बेचता है।
- उनके द्वारा “महाशय चुन्नीलाल चैरिटेबल ट्रस्ट” चलाई जा रही है, जिसके अंतर्गत 250 बिस्तरों वाला एक अस्पताल और झोपड़पट्टी के निवासियों के लिए एक मोबाइल अस्पताल चलाया जा रहा है। इसके अलावा दिल्ली में 4 स्कूल भी चलाता है। इस ट्रस्ट के द्वारा वित्तीय सहायता भी सामाजिक संगठनों को दी जाती है।
- एमडीएच संदेश पत्रिका भी चलाता है, जो भारत के पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों को प्रदर्शित करता है।
- वह अपनी सेहत के प्रति काफी सजग रहते हैं, जिसके चलते वह सुबह 5 बजे योगा करते हैं।
- उन्होंने अपनी आत्मकथा को जारी किया है, जिसमें उनके प्रारंभिक बचपन से लेकर सफलता के पीछे के रहस्य का खुलासा किया गया है।